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Team Anna Dissolved - Anna Hazare

टीम अन्ना का कार्य समाप्त हो गया है जनलोकपाल कानून सरकार बनाने के लिए राजी नहीं है। कहां तक बार-बार .....



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  #1  
08-06-2012
Administrator
 
: Oct 2008
:
: 100 | 0.03 Per Day
Exclamation Team Anna Dissolved - Anna Hazare


टीम अन्ना का कार्य समाप्त हो गया है

जनलोकपाल कानून सरकार बनाने के लिए राजी नहीं है। कहां तक बार-बार अनशन करते रहोगे। अब अनशन छोड़ो और देश की जनता को विकल्प दे दो। यह मांग जनता से बढ़ती गई। मैंने भी सोचा आज की सरकार से देश का भ्रष्टाचार कम नहीं हो सकता। कारण, सरकार की मंशा ही नहीं है।

जनलोकपाल कानून से भ्रष्टाचार दूर होगा। यह देशवासियों की आशा थी। लेकिन डेढ साल बीत गए। बार-बार जनता ने आंदोलन करने के बाद भी सरकार जनलोकपाल कानून लाने को तैयार नहीं। अच्छे लोगों को खोज करके जनता को विकल्प देना। यह अच्छा रास्ता है। ऐसा मुझे लगा। लेकिन होगा कैसे? यह मेरे सामने प्रश्न है।

मुझे विकल्प देने की बात करने वाले लोगों के सामने जंतर मंतर पर खुलेआम मैंने एक प्रश्न खड़ा किया। आप विकल्प की बात करते हैं। मैं देशभर में दौरे करूंगा। लोगों को जागरूक करूंगा अच्छे सदाचारी, राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, सामाजिक दृष्टिकोण है, सेवा भाव है ऐसे लोग संसद में नहीं जाएंगे तब तक बदलाव नहीं आएगा। यह बात मुझे मंजूर है लेकिन-

1. ऐसे लोगों की खोज करने का तरीका क्या होगा?

2. विकल्प देने के लिए पार्टी बनानी होगी। उस पार्टी बनाते समय पार्टी सदस्य चुनने का तरीका क्या होगा?

3. आज अधिकांश पार्टी बोर्ड लगाती हैं। सभासद नोदनी (रजिस्ट्रेशन) का काम चालू है। भ्रष्टाचारी हो, गुंडा हो, व्यभाचारी हो, लूटारू हो इनको न देखते हुए भी सभासद बनाती है। इस प्रकार के सभासद बनाए तो इस आंदोलन का क्या होगा?

4. मैं खुद कोई पक्ष-पार्टी में नहीं बनाऊंगा। मैं चुनाव नहीं लडूंगा। लेकिन जनता के सामने विकल्प देने के लिए जरूर प्रयास करूंगा।

5. आज एक चुनाव के लिए 10 से 15 करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्चा होता है। देश को विकल्प देने के लिए इतना पैसा कहां से लाएंगे?

6. चुनाव में चुनकर आने के बाद उनकी बुद्धि का पालट हो गया तो क्या विकल्प है? कारण, जनता चुनकर देते समय अच्छा उम्मीदवार है यह समझकर ही चुनकर देती है। लेकिन कुर्सी का गुण-धर्म है कि कई लोगों की बुद्धि पलट जाती है और स्वार्थ के कारण वह भ्रष्टाचार करने लगते है। जैसे आज कई पार्टियों में दिखाई दे रहा है। उसके बारे में क्या सोच है? ऐसे लोगों की मानटरिंग करने का तरीका क्या है?

7. आज पकृति और मानवता का दोहन हो रहा है और सरकार उसे नहीं रोक रही। यह देश के लिए बड़ा खतरा है। क्या विकल्प होगा?

8. जंतर मंतर पर जो हजारों लोग आए थे उनको टीम ने पूछा कि विकल्प देना चाहिए या नहीं और सभी ने हाथ ऊपर उठाए। ये अच्छी बात है। लेकिन सिर्फ जंतर मंतर देश नहीं है। देश बहुत बड़ा है। उनकी भी राय लेना जरूरी है। मेरी अपेक्षा है। देश में 6 लाख गांव हैं। इन सभी गांव की ग्रामसभा की ग्रामसभाओं ने अपना सुझाव पारित करना है कि हम विकल्प मांगते है। इसलिए हमारी ग्रामसभा का सुझाव आपको भेजते हैं कि संसद में अच्छे लोग जाए इस बात से हमारी सहमति है। ग्रामसभा संभव नहीं है वहां पर व्यक्ति ने फार्म पर हस्ताक्षर करके कहने है कि हम विकल्प के लिए तैयार है।

9. जिस प्रकार गांव में ग्रामसभा का सुझाव होगा उसी प्रकार नगर परिषद्, नगरपालिका, महापालिका में वार्ड सभा और मोहल्ला सभा का भी सुझाव करना होगा। तब स्पष्ट होगा कि लोकसभा में अच्छे लोगों को भेजने की जनता की तैयारी है।

ऐसा होता है तो मैं अगले डेढ साल देश में सफर करूंगा। और देशवासियों को जगाऊंगा। और जनता से ही अपील करूंगा कि लोकसभा में भेजने के लिए चारित्रशील उम्मीदवार की खोज करो। खोज होने के बाद उनका सेवा भाव, चरित्र, राष्ट्र प्रेम, उनका कार्य उसकी मानटरिंग के लिए हमारे कार्यकर्ता जाएगे। उनकी जांच करेंगे। उसके बाद चयन होगा। मैंने महाराष्ट्र में यह प्रयोग किया है। विधानसभा के 12 लोग मैंने चुने थे। उसमें से 8 लोग चुनकर आए थे।

मैंने संसद में अच्छा उम्मीदवार भेजने का विकल्प देने की बात करते ही कई लोगों ने घोषणा की कि अन्ना ज़ीरो बन गए। मैं तो पहले से ही ज़ीरो हूं, मंदिर में रहता हूं, न धन न दौलत, न कोई पद, अभी भी ज़मीन पर बैठकर सादी सब्जी-रोटी खाता हूं। पहले से ही ज़ीरो है और आखिर तक ज़ीरो रहूंगा। जो पहले से ज़ीरो है उसको ज़ीरो क्या बनाएगे? जिसको कहना है वो कहता रहे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। आजतक 25 साल में मेरी बदनामी करने के लिए कम से कम 5 किताबें लिखी गई। कई अखबार वालों ने बदनामी के लिए अग्रलेख (संपादकीय) लिखे है। लेकिन फक़ीर आदमी की फक़ीरी कम नहीं हुई। इस फक़ीरी का आंनद कितना होता है? यह बदनामी करने वाले लोगों को फक़ीर बनना पड़ेगा तक समझ में आएगा। एक बात अच्छी हुई की जितनी मेरी निंदा हुई। उतनी ही जनता और देश की सेवा करने की शक्ति बढ़ी। आज 75 साल की उम्र में भी उतना ही उत्साह है। जितना 35 साल पहले काम करते वक्त था। देश का भ्रष्टाचार कम करने के लिए जनलोकपाल कानून बनवाने के लिए कई बार आंदोलन हुए। 4 बार अनशन हुए। लेकिन सरकार मानने के लिए तैयार नहीं इसलिए टीम ने निर्णय लिया अनशन रोककर विकल्प देना पड़ेगा।

सरकार से जनलोकपाल की मांग का आंदोलन रुक गया लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। पहले सरकार से जनलोकपाल कानून की मांग करते रहे। सरकार नहीं करती इसलिए जनता से ही अच्छे लोग चुनकर संसद में भेजना और जनलोकपाल बनाने का आंदोलन शुरू करने का निर्णय हो गया। अगर जनता ने पीछे डेढ साल से साथ दिया, वह कायम रहा तो जनता के चुने हुए चरित्रशील लोग संसद में भेजेगे। और जनलोकपाल, राइट टू रिजेक्ट, ग्रामसभा को अधिकार, राइट टू रिकॉल जैसे कानून बनवाएंगे। और आने वाले 5 साल में भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण पक्ष और पार्टी से नहीं जन सहभाग से करेंगे। 2014 का चुनाव भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाने के लिए जनता के लिए आखिरी मौका है। इस चुनाव के बाद फिर से ऐसा मौका मिलना मुश्किल है। कारण, इस वक्त देश जाग गया है। अभी नहीं तो कभी नहीं। मैंने बार-बार बताया है कि मेरा जीवन समाज और देश सेवा में अर्पण किया है। इस वक्त जनता का साथ नहीं मिला तो नुकसान अन्ना का नहीं जनता का होगा। अन्ना तो एक फक़ीर है और मरते दम तक वो फक़ीर ही रहेगा। मैंने अच्छे लोग चुनकर संसद में भेजने का विकल्प दिया है। लेकिन मैं पक्ष-पार्टी में शामिल नहीं होऊंगा। चुनाव भी नहीं लडूंगा। जनता को जनलोकपाल का कानून देकर मैं महाराष्ट्र में अपने कार्य में फिर से लगूंगा। पार्टी निकालने वाले लोगों को भी मैंने बताया है। पार्टी बनाने के बाद भी यह आंदोलन ही रहे। पहले आंदोलन में सरकार से जनलोकपाल कानून मांग रहे थे। अब आंदोलन जारी रखते हुए जनता के सहयोग से अच्छे लोगों को चुनाव में खड़ा करके संसद में भेजो और कानून बनाओ। दिल और दिमाग में सत्ता न रहे, राज कारण न रहे, यह देश की देशवासियों की सेवा समझकर करो। अगर सत्ता और पैसा दिमाग में आ गया तो दुसरी पक्ष-पार्टी और अपनी पार्टी में कोई फर्क नहीं रहेगा। जिस दिन मुझे दिखाई देगा कि देश की समाज की सेवा दूर गई और सिर्फ सत्ता और पैसा का प्रयास हो रहा है। उसी दिन मैं रुक जाऊंगा। आगे नहीं बढूंगा। क्योंकि मैंने समाज और देश की भलाई के लिए विकल्प देने का सोचा है। मेरा जीवन उन्हीं की भलाई के लिए है।

आज टीम अन्ना का कार्य हम लोगों ने समाप्त किया है। जनलोकपाल के कार्य के लिए टीम अन्ना बना गई थी। सरकार से संबंध् नहीं रखने का निर्णय लिया है। इस कारण आज से टीम अन्ना नाम से चला हुआ कार्य समाप्त हो गया है और अब टीम अन्ना समिति भी समाप्त हुई है।

भवदीय,

कि. बा. उपनाम अण्णा हज़ारे
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  #2  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: kanpur
: 28
:
: 3 | 0.00 Per Day

anna ji pranam! apke prashn atyant mahtwapurna hai.....aur sabse jyada ki kya garantee rajneeti me aane ke baad buddhi/aachran nahi badlega...yaqeen kare aaj bhi is bharat me mere jaise yuva hai...jo dridh pratigyayi hain....hum apko legally likh kar denge ki agar mere khilaaf bhrastachar ka saboot mile to muje fansi de di jaye.....Mera manna yeh hai ki bina sakht kanoon k aur saja k bhrastachar kabhi band nhi hoga...

paise ki chinta kyun....desh me 121 crore janta hai....hum 1-1 rs bhi denge desh hit me toh itna ho jayega.....ki aane wale 5-10 chunaav lad le ........main apse sehmat hun ki asambhav kuch nahi.....aur bina rakt k kranti bhi nahi safal hui....aapki aur team anna ki pure desh ko zarurat hai...par meri toh sirf apne mata-pita ko...but BHARAT Maa sabki maa hai ...unke liye rakt bahana garv ki baat hogi.

Last edited by alokdwivedi; 08-06-2012 at 01:50 PM
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  #3  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: Jaunpur,uttar pradesh
:
: 5 | 0.00 Per Day
team anna dissolved

it's very sad news India need such community otherwise India will separate by small regional u can see assam riots soon day will come when they asked for separate nation if govt will failure continue

i hope never u loose my faith about team anna
__________________
With Best Regards,
Abhishek Mishra
mishra.abhishek933@gmail.comhttp://www.facebook.com/abhishek.jnp
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  #4  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: Rajasthan
:
: 5 | 0.00 Per Day

Things I'd like to see in your political party's agenda :
1) In your political party, try to give atleast 30% of seats to highly intellectual women.
2) While making plans for recruitment, consider the Political sciences students first..
3) Include Shadow ministers (like what is there in U.K.)
(act as a party in power and the pressure group by your own)
4) Visit various universities and by your ardent speeches make the youths in your favor.
lastly I'd like to say
Absolute enthusiasm is also very harmful, so take your time and spread your ideas and try to give a quick political perspective to the "Aam Admi of India" and explain them that its neither the religious community nor the ethical backgroundis which is good for their family or its future but it is the rational attitude and humanistic nature which is beneficial for everyone.
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  #5  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: Mumbai
:
: 11 | 0.00 Per Day

If team Anna id dissolved , then who is heading the movement to take it to next stage?
First they must establish a head office in Delhi, and appoint office bearers.
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  #6  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: New Delhi
: 40
:
: 1 | 0.00 Per Day

Bharat mata ki Jai

I strongly support to Anna ji and his team on this move

Anna tum sangharsh karo desh tumare sath he
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  #7  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: Bangalore
: 41
:
: 2 | 0.00 Per Day

These are the 10 things that I think is extremely important and basic:

1. Ensure that every citizen has access to clean water, food and shelter.
2. Interconnect various rivers in India to avoid flood in one state and draught in another. We are all part of one nation.
3. Provide good infrastructure to attract more investment and accelerate growth
4. Create accountability for public money that is spent.
5. Provide a clean and healthy environment so that we have a healther future generation.
6. Remove the system of reservations so that there is healthy competition.
7. Restore all the lakes that we have in the country and preserve water.
8. Preserve and utilize our natural resources in a planned manner.
9. No Corruption. Completel accountability at micro level of every tax money that is spent.
10. Eliminate power and muscle politics from the country
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  #8  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2011
: Bangalore
: 36
:
: 18 | 0.01 Per Day

Respected Anna ji,

Below I have tried to answer your question as per my knowledge:

1. ऐसे लोगों की खोज करने का तरीका क्या होगा?
-- You can ask for application from willing people from each constituency and also you can invite some people to whom you and your committee feels right candidate from each constituency. I feel candidate must be local so that he/she must be having good knowledge of that area. Give ticket to only that person who is educated, and willing to work for the country in real sense. I feel there must be various rounds for this such as written then 2 round of interviews.

2. विकल्प देने के लिए पार्टी बनानी होगी। उस पार्टी बनाते समय पार्टी सदस्य चुनने का तरीका क्या होगा?

Party k sadsya educated hone k sath sath experienced bhi hone chahiye. Such as experienced patrkaar, IAS officers, Army chief etc.

3. आज अधिकांश पार्टी बोर्ड लगाती हैं। सभासद नोदनी (रजिस्ट्रेशन) का काम चालू है। भ्रष्टाचारी हो, गुंडा हो, व्यभाचारी हो, लूटारू हो इनको न देखते हुए भी सभासद बनाती है। इस प्रकार के सभासद बनाए तो इस आंदोलन का क्या होगा?
Yes, You are right iss tarah k candidate se koi fayda nahi hoga..But selected people must be courageous. And unke khilaf ek bhi case nahi hona chahiye. Abb bharat ko saf suthri loksabha chahiye jis se desh ka nav nirmaan kiya ja sake.

5. आज एक चुनाव के लिए 10 से 15 करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्चा होता है। देश को विकल्प देने के लिए इतना पैसा कहां से लाएंगे?

Aap paise ki chinta na kare. You can take money from people of india by SMS. I hope all indian citizen can donate 5 rs per day. But yes you need to maintain transparency in collected money.

6. चुनाव में चुनकर आने के बाद उनकी बुद्धि का पालट हो गया तो क्या विकल्प है? कारण, जनता चुनकर देते समय अच्छा उम्मीदवार है यह समझकर ही चुनकर देती है। लेकिन कुर्सी का गुण-धर्म है कि कई लोगों की बुद्धि पलट जाती है और स्वार्थ के कारण वह भ्रष्टाचार करने लगते है। जैसे आज कई पार्टियों में दिखाई दे रहा है। उसके बारे में क्या सोच है? ऐसे लोगों की मानटरिंग करने का तरीका क्या है

Whatever person who get eleceted, he has to sign a paper that if he found wrong any where then he has to return all the money. And he will be sent in jail till the end of his life. And I also believe MPs ka work check bhi hote rehna chahiye. Hamare desh me logo me morality khatm ho rhai hai hume usse develop karna hoga. Cause darr se saja se cheej ko rok sakte hai par to finish it from bottom we need to develop good moral values in people. But this is a long term thing.

We all are with you...And great decision for creating party.

Jai Hind

Shalini
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  #9  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: Delhi
: 41
:
: 3 | 0.00 Per Day

प्रिये मित्रों,

इतिहास गव्हा है की पूरी दुनिया मैं पर्त्येक क्रांति के बाद हमेसा एक मजबूत राजनेतिक नेत्रित्व का जनम होता है, भारत की आजादी की लड़ी का अंत कांग्रेस के जनम के साथ हुआ और वो पार्टी देश के पहली रुल्लिंग पार्टी बनी, और बांकी पार्टियों ने विपक्ष की भूमिका निभाई, राजनीती एक ऐसा दलदल है जिसमे जाने के बाद लगभग लोगों का दामन दाग दार हो जाता है, आज भले अन्ना जी का फैसला भी इसी बात की मिस्साल है की उन्होने कई लोगों के दवाव मैं आने के बाद अनसन तोड़ने और राजनेतिक पार्टी बनाने का फैसला लिया, सही बात तो यह है की अगर आना जी रेगिस्तान मैं से भी क्रांति का आवाहन करें तो पूरा देश उनके साथ हो लेगा, इसलिए टीम अन्ना को दो गुटों मैं बंट जाना चाहिए पहला अन्ना जी जो की पुरे देश मैं घूम घूम कर भ्रस्ताचार के खिलाफ लोगों को एक जुट करें और अरविन्द जी और बांकी लोग दुसरे गुट मैं इस देश के लीये नया और ईमानदार और ताकतवर नेत्रित्व को तैयार करें जो की वक़्त आने पर देश के अन्द्र्रुनी मुद्दों के साथ साथ चीन और पर्किस्तान को भी करारा जवाव दे सके, हो सकता है की इन सब मे वक़्त लगेगा पर देर सबेर मजिल मिल जाएगी...

धन्येवाद
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  #10  
08-06-2012
Junior Member
 
: Aug 2012
: Jaunpur,uttar pradesh
:
: 5 | 0.00 Per Day

Shalini ji

yes it's ok
i agree with u
__________________
With Best Regards,
Abhishek Mishra
mishra.abhishek933@gmail.comhttp://www.facebook.com/abhishek.jnp

Last edited by akm21; 08-06-2012 at 04:03 PM
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