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  #10  
03-05-2011
ramshanker
Junior Member
 
: Mar 2011
: Vasundhara
:
: 1 | 0.00 Per Day

जो भी है सही है , ये नियम हमारे भारत में मानते है. और लगता है शायद यही करते रहेंगे. आरक्षण न कभी किसी का भला किया है नहीं कभी करेगा. जिनको इनकी जरुरत है कभी भी ये उनको मिलने वाला नहीं है ...क्यूँ की जो लोग इन आरक्षण में आते है . उनके तक पहुचने से पहले ही उनके ही लोग उसे बिच में काट कर रख देते हीं...ताकि उनके तक ये सुबिधा नहीं पहुच सकें . ये एक ऐसा बीमारी जो कभी इलाज नहीं हो सकता है. जब तक वो इंसान इस दुनिया से चला नहीं जाए.
जहा तक जिम्मेदारइ की बात है .तो सबसे पहले हमें जो समाज सेवा करना चाहते है. इन लोगों को शिक्षित करे. जब ये शिक्षित होंगे तो ये अपने आप समाप्त हो जायेगा. क्यूँ बिना सोचे समझे करना किसी की समझदारी नहीं होती है.
आरक्षण एक ऐसा आग है जो कितने ही घर को जला चुकी है. और पाता नहीं कितने घर और जलेंगे. लेकिन इस आग से किसी को भी रत्ती भर भी फायदा नहीं हुआ और न होगा.
जिनको इस आग की जरुरत है वो इनसे इतने दूर हैं की उनके पास आग क्या उनकी गर्मी भी पहुचना संभव नहीं हाही.
अभी भी अगर हम लोग जाकर देखेंगे तो पायेंगे की संसार तो बदला है ..देश का नाम तो बदला है ...लेकिन हमारा वो समाज नहीं बदला है ..वो रीती रिवाज नहीं वदला ही ...हमारी मानसिकता नहीं बदली है .
अभी भी हम उसी सोच के साथ जिए जा रहे है ..
मेरा और मेरा , जब तक ये हम सोचेंगे ...इस देश का क्या , अपने परिवार का भी भला नहीं कर सकते हैं.
सबसे पहले हमें खुद को बदलना पड़ेगा. हम क्या कर रहे है ....अपने देश और सम्माज के लिए ...
क्या हमारे लिखने से या बोलने से हमारे देश और सम्माज की तस्वीर बदल जायेगी.
नहीं ...कभी नहीं...इस देश को आजाद करवाने में कितनी ही खून की नदिया बही. न जाने कितने लोग अपने जानो की आहुति देकर इस देश का आजार करवाया ..क्या मिला ?
कोई ये सर उठा कर कह सकता है ...की मैंने देश के लिए काया किया , इस समाज के लिए मैंने क्या किया ?
नहीं ....बिल्कुल नहीं ...
हमें तो अपने स्वार्थ में कुछ और नहीं दिखाई देता है.
ऐसे तो हम बहुत कुछ बोल देते है ...कह देते है ..जब कुछ करने की बात आती है ..तब हम कुछ न कुछ बहाना देकर वह से निकल जाते है ...इतने सारे लोग है....हमारे देश में ...मेरे एक नहीं करने से देश और समाज पर क्या असर पड़ेगा...वाह रे हमारे देश वाशी. धन्य है हमारे देश .....
धन्य है हमारी मिटटी. जो इन जैसे महान आतामाओ का जनम हुआ है ...
जो अपने साथ साथ किसी को भी ..कुछ कर सकता है ....फिर देश क्या ..समाज क्या और .परिवार क्या ?
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Vande Matram !

Ram Shanker
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